किसी नदी को पैदल पार करने का सुख…

देवगांव संगम से मार्कण्डेय आश्रम (12वां दिन)

देवगांव संगम पर हमें एक बेहद खूबसूरत आश्रम मिला. इस आश्रम में शांति, संगीत, विविधता, आनंद और सामुदायिकता की भावना इसे एक अलग ही छटा प्रदान कर रही थी. इस आश्रम में काफी परिक्रमावासी रुकते हैं.

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इनमें से कुछ हमें लेकर बहुत ही उत्सुक थे. वे जानना चाहते थे कि हमारे पास क्या-क्या सामान है? स्लीपिंग बैग कैसे काम करता है? बॉटल में क्या रखा है? और भी बहुत- सी बातें वो जानना चाहते थे. मैं चाहता था कि उनमें से कुछ लोग मुझे मेरे पहने हुये कपड़ों के बारे में लेक्चर दें. लेकिन उनमें से केवल चार ने ही इस बारे में बात की.

मैंने उनके एक ही सुझाव के अलग-अलग जवाब दिये. जैसे एक को मैंने कहा कि मैं सिर्फ़ अपनी बांसुरी की धुन को फॉलो करता हूं. दूसरे को कहा कि मैं बहुत मूर्ख हूं और नर्मदा मैया से उम्मीद कर रहा हूं कि वो मुझे सफेद कपड़े पहनने पर मजबूर कर दे. एक वृद्ध महिला को कहा कि यदि आप मुझे नहीं सिखाएंगी तो कौन सिखायेगा?

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शाम को हम आश्रम की आरती में शामिल हुये. वहां बहुत कम वाद्य यंत्रों का उपयोग किया गया था लेकिन उनकी एनर्जी बहुत हाई थी. उन्होंने मेरी बांसुरी को देखा और मुझे शामिल होने के लिए कहा. मैंने बांसुरी बजाना शुरु किया और अपने आप ही उस माहौल से कनेक्ट हो गया. मैं स्वयं की रचना से अभिभूत था. हम तब तक बजाते रहे जब तक कि एक बाबा ने नाराज़ होकर हमें कह नहीं दिया कि उनकी नींद में हम खलल डाल रहे हैं.

आज सुबह हमने आश्रम को त्याग दिया और नर्मदा की एक सहायक नदी को पैदल चलकर पार किया. किसी नदी को पैदल पार करना मेरी पैदल यात्रा का सबसे बेहतरीन भाग होता है. यह मुझे बीते समय में ले गया. और मैंने सोचा की ऐसा मैंने काफ़ी समय के बाद किया है.

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आज हमने 20कि.मी. ही चलने का फैसला किया था. इसलिए हम आराम से धीरे – धीरे चल रहे थे और कई ब्रेक भी बीच – बीच में लिये. इस दौरान रास्ते में एक जगह गांव के बच्चों को क्रिकेट खेलता देख उनके साथ आधा घंटा क्रिकेट भी खेला.

शाम के करीब 05 बजे हम रामनगर पहुंच चुके थे. यहां हमे लगा कि रात खुले एरिया मे बिताना पड़ेगी. इसलिए हमने और चलने का फैसला किया. हम 08 कि. मी. और चले. इसमें से एक घंटा हमें अंधेरे में चलना पड़ा तब जाकर हम इस आश्रम में पहुंचे. तो आज कुल मिलाकर 28 कि.मी.चले.

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अब हम बहुत थक गए हैं. और मेरा मन बहुत ही शांत है. मेरा बायां कंधा दर्द से कराह रहा है. लेकिन मैंने इस दर्द को अपने गले से लगा लिया है. और यह अब मेरा ही एक भाग है. चूंकि पिछली रात मेरे लिए बहुत ही संगीतमय थी इसलिए आज मैं आनंदमय हूँ.

(नर्मदा परिक्रमा प्रोजेक्ट गो नेटिव के साथ )

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