घुमंतू लड़की-4: ये अनुभव मैं ज़िंदगी भर नहीं भूल पाऊंगी

रात के 8 बजे. जंगलिया गांव की रात.

आज की रात इस खूबसूरत से गांव में गुजारनी थी. चाँद के नीचे. पूर्णिमा को एक रात और थी. पर चाँद अपनी सबसे खूबसूरत रूप में था. जंगल की आवाज़ रात भर अपने होने का एहसास कराती रही.

अगला पड़ाव अब अल्मोड़ा था. अगले दिन मुझे अपने पहले अनजान होस्ट से मिलने जाना था. जिनको मैंने काउचसर्फिंग से रिक्वेस्ट भेजी थी.

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मेरी धड़कनें बढ़ी हैं. पता नहीं क्या होगा. जिनके घर मैं जा रहीं हूँ वो खुद अपने घर पर नहीं हैं. ऐसे में अजीब महसूस करुँगी या शायद अपने बर्ताव से वापस सब सही कर जाऊंगी. रात इसी उपापोह में गुजरी. एक रात और ऐसे ही एक खुली सी जगह में बीत गई.

हाँ, काउच सर्फिंग के बारे में बताना तो मैं भूल ही गयी.

जैसा कि मैंने पहले बताया था इस बार मुझे अपने ट्रैवल में कुछ एक्सपेरिमेंट करने थे. किसी भी जगह के लिए आने-जाने के टिकट, लक्जरी होटल बुक करके, घूमना जरा अलग हो जाता है. एक ट्रैवलर और टूरिस्ट में यही फर्क है. ‘Be Raw’ वाला जुमला मुझे बहुत भाता है.

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जो मज़ा एक ढाबे में बैठ कर आस-पास के लोगों से बात करने में मिलता है, जो कहानियाँ मालूम पड़ती हैं वो सुकून वो मज़ा किसी और में नहीं. मुझे लोगों को जानना था उनके बीच रहना था. मुझे अनजान बच्चों को देख कर मुस्काना था. उनके बारे में जानना था.

मुझे बस बात करनी थी. मुझे एक्सपीरियंस चाहिए थे, दूसरों की कहानी से मिले. उनकी मुस्कान में लिपटे. साथ ही प्री-कंडीशन्स को ज़रा अलग करने का भी मन था. ऐसे में एक नया मोड़ आया काउचसर्फिंग से. काउचसर्फिंग के बारे में पता था लेकिन इससे पहले किसी अनजान के घर मैं ऐसे नहीं रही थी.

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काउचसर्फिंग एक नेटवर्किंग साइट है. पर जरा अलग है. ये वेबसाइट ख़ास ट्रैवलर्स के लिए बनाई गयी है. हार्डकोर ट्रेवलर्स इसका भरपूर इस्तेमाल करते हैं. हालांकि भारत में इसकी जान पहचान जरा कम है लेकिन फॉरेन कंट्रीज़ में ये खूब फेमस है.

इस वेबसाइट में ट्रैवलर्स आपस में होस्टिंग करते हैं. इस वेबसाइट में अगर अकाउंट है तो पूरी दुनिया में कहीं भी ट्रेवलर्स को खोजा जा सकता है. उनसे कॉन्टैक्ट कर सकते हैं. इनफॉर्मेशन ले सकते हैं और अगर वो परमिशन दें तो उनके यहां रहा भी जा सकता है.

मेरा अकाउंट था इस पर और मैंने दो लोगों को भोपाल में होस्ट भी किया हुआ था. इस बार होस्ट ढूंढने की बारी थी. हल्द्वानी और भीमताल में तो दोस्ती थी. कुछ जान पहचान थी तो ये आसान था पर अल्मोड़ा में मैंने पहचान नहीं निकाली इसलिए काउचसर्फिंग को अब अल्मोड़ा में ट्राई करना था.

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ट्रिप प्लान करने के वक़्त मैं जगहों को लेकर श्योर तो थी नहीं. मुझे घूमना था. पर ऐसे घूमना था जहाँ ज्यादा एक्सप्लोर नहीं किया गया है. अक्टूबर के आखिर की बात थी ये. दिल्ली के आस-पास किन जगहों में मैं जा सकती थी सबकी लिस्ट बना डाली. लेकिन फिर भी ये फाइनल करने में बेहद दिक्कत थी कि किस जगह चली जाऊं! और जैसा कि शाहरुख़ खान ने भी एक फिल्म में कहा है ‘तुम जिसे पाने की पूरे दिल से तमन्ना करते हो सारा जहान उसे आपने मिलाने में लग जाता है’ डायलॉग सही से याद तो नहीं पर इसका मतलब मैं जरूर समझ गयी.

हुआ यूँ कि एक दिन अचानक मेरी नजरों के सामने नासा एक आर्टिकल आया जिस पर एक ‘जादुई जगह’ के बारे में लिखा गया था. मैंने रिसर्च की और पता चला कि मेरे ट्रैवल की डेट्स के दौरान ही उस जगह पर एक बड़ा मेला भी लगता है. मैंने मन बना लिया और निकल गयी इस सफ़र का एक पड़ाव अल्मोड़ा था तो होस्ट अल्मोड़ा में ढूंढा.

करीब 1 हफ्ते पहले मैंने 2 लोगों को रिक्वेस्ट भेजी थी स्टे की. दोनों ने ही एक्सेप्ट कर ली थी. मैंने काउचसर्फिंग के ‘काउच’ एक्सपीरियंस के बारे में पढ़ भी रखा था तो एक तरफ मन डरा सा भी था. पर अपने नाम के हिसाब से मुझे दुनिया पर आस्था बहुत है.

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मुनीर जिनके काफी रिव्यू थे काउचसर्फिंग में मैंने उनसे बात की. और अपने ट्रिप के बारे में बताया भी. पर मेरी ट्रेवल डेट्स कन्फर्म नहीं थी. बस इतना पक्का था कि 3 नवंबर को मुझे कसार देवी यानी ‘जादुई जगह’ में रहना है. मुनीर मुझे हर बार फ़ोन करके कन्फर्म करने को कहते, मैं कब आने वाली हूँ. मैंने उन्हें सिर्फ 4 दिन पहले अपना पूरा ट्रेवल प्लान भेजा.

मैंने हालांकि अपनी तरफ से सारी प्लानिंग की थी. अब हर जगह से बुरी खबर सुनने का ये बहुत नुकसान होता है कि दिमाग नेगेटिव के बारे में ज्यादा सोचा करता है. मैंने अल्मोड़ा के होटल भी पता किये कि अगर कुछ ज्यादा एक्सपीरिएंस के चक्कर में मैं खतरे में पड़ी तो बचा लूंगी खुद को. पर यहाँ मुझे ऐसा अनुभव मिला जिसे मैं जिंदगी में कभी भी नही भूल पाऊंगी.

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