‘इस यात्रा में हमने जो चाहा हमारी हर इच्छा पूरी हुई’

हमारी हर इच्छा मांगने के साथ ही पूरी होती गयी. मैंने यह बात जब लोगों को बतायी तो वे मुस्कुराते हुये बोले – “आगे-आगे देखो होता है क्या?”

‘रोती हुई उस लड़की को मैं गले लगाना चाहता था लेकिन…’

…सिक्के का दूसरा पहलू कुछ और है. क्या हम इसलिए निंदा नहीं करें कि सबकुछ ठीक है और हमारे पक्ष में है?

ट्रिप यादगार बनाने के लिए बहुत काम के हैं ये 5 टिप्स

बैकपैकिंग ट्रिप्स हमेशा मजेदार होती हैं, खासकर तब जब आपके पास ‘बोझ’ ज्यादा ना हो!