Book Review: देश के सर्वश्रेष्ठ युवा लेखक की कविताएं…

किताब का नाम – न्यूनतम मैं
लेखक – गीत चतुर्वेदी
समीक्षक – ब्रजेश एमपी

27 नवंबर 1977 को मुंबई में जन्मे गीत चतुर्वेदी की ताज़ा किताब उनका कविता संग्रह “न्यूनतम मैं” है, जो कि राजकमल प्रकाशन से आया है. इससे पहले 2010 में “आलाप में गिरह” प्रकाशित. उसी वर्ष लम्बी कहानियों की दो किताबें “सावंत आंटी की लड़कियां” और “पिंक स्लिप डैडी” आईं.

उन्हें कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गल्प के लिए कृष्ण प्रताप कथा सम्मान मिल चुके हैं. “इंडियन एक्सप्रेस” सहित कई प्रकाशन संस्थानों ने उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शुमार किया है.

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Facebook/GeetChaturvedi

उनकी रचनाएँ देश-दुनिया की सत्रह भाषाओँ में अनूदित हो चुकी हैं. उनके नॉवेला “सिमसिम” के अंग्रेजी अनुवाद (अनुवादक: अनिता गोपालन) को “पेन अमेरिका” ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित “पेन-हैम ट्रांसलेशन ग्रांट 2016 अवार्ड किया है.

गीत हिंदी कविता के अब एक तरह से वैश्विक पहचान बन चुके हैं. उनकी कविताओं का चौदह भाषाओँ में अनुवाद हो चुका है और इन अनुवादों को दुनिया भर में सराहा गया है.

गीत की कविताएँ नयी सदी की कविताएँ हैं . सारी कविताएँ मानव संवेदनाओं की अद्वितीय प्रस्तुति हैं.

गीत चतुर्वेदी को पढ़ना ख़ुद के उस हिस्से को खोजना है जो जिंदगी की आपाधापी में कहीं खो गया है. उनकी कविताएँ कृतज्ञता का भाव लिए हुए है. वो उन सबका जिक्र करते हैं जिनसे वो प्रेरित हुए हैं.

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Facebook/GeetChaturvedi

किताब में *(तारा चिन्ह्) द्वारा बाद में उनको विस्तार से बताया गया है। इस संग्रह में कविताओं की फॉर्मेटिग कुछ नई तरह से है जिसे असम्बध्द काव्य रचना कहा जाता है. जिसमें बाईं ओर की पंक्तियों को एक साथ पढ़ा जा सकता है, दाहिनी ओर की पंक्तियों को एक साथ. इनकी एक और विशेषता यह है कि अगर किसी कविता को हम टुकड़ों में बांट भी दे तो वो भी वो पूर्ण लगती है और अपने महत्व को खोती नहीं है.
इस कविता संग्रह मे पांच सर्ग है जिनमें अलग – अलग विषयों की कविताएँ संकलित है. प्रथम सर्ग में अठारह कविताएँ हैं. जो कि दर्शन के थीम पर बनी है. इसमें ही कविता ‘न्यूनतम मैं’ सम्मिलित है. इसके अलावा इसमें कुमार संभव, पंचतत्व, नाख़ून और छोटा ईश्वर कविताएं अच्छी बन पड़ी है.

संस्कृत महाकवि श्रीहर्ष को समर्पित कविता ‘वत्सदंत’ में वो कहते हैं –

सारे देव प्रेम करते थे प्रेम का एक भी देव नहीं
वासना का देव था जो अपनी देह ही न संभाल पाया

द्वितीय सर्ग में 27 कविताएं हैं. जो कि प्रेम के थीम पर आधारित है. इसमें सारे सिकंदर, चम्पा के फूल, निविद, जीसस की कीलें बहुत उम्दा लिखी गई है. कविता ‘मंथरता से थकान’ में –

प्रेम तुम्हारी नीति थी मुझ पर राज करना तुम्हारी इच्छा
मैं तुम्हारी राजनीति से मारा गया

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Facebook/GeetChaturvedi

तृतीय सर्ग में 08 कविताएँ हैं. जो स्मृतियों को आधार में रखकर इस सर्ग में संकलित है.

इसमें मिर्जा गालिब, त्रान आन्ह हुंग, वांग कार – वाई, नूरी बिल्गे जेलान, यासूजिरो ओज़ू को कविताएं समर्पित है . गीत ने यहां उक्त रचनाकारों से प्रेरित होकर कविताओं के माध्यम से उस प्रेरणा को दर्शाया है.

चतुर्थ सर्ग में 09 कविताएँ हैं. जो कि राजनीति के थीम पर गढ़ी गई है। इसमें अब्बू खां की बकरी, मध्यवर्ग का मर्म – गीत, मुद्रास्फीति अच्छी बन पड़ी है.

कविता ‘बैंगन की पिचकारी’ कवि के बचपन की स्मृतियों पर आधारित है –
कोई तुम्हें सुन लेता है तो इसमें तुम्हारे बोलने का गौरव नहीं
सुन लेने की उसकी इच्छा का है.

पंचम सर्ग में एक लंबी कविता ‘उभयचर’ है. जो कि चेस्वाव मीवेश और विष्णु खरे को समर्पित है. इसमें कवि कहते हैं –

हम आपातकाल की संतान हैं सन 75 से 77 के बीच जन्मे हम उभयचर जो निरंकुशता का अमूर्तन अपने भीतर ले चलते रहे सदा अराजक घोड़ों की तरह जमीन के उबड़ – खाबड़पन को नकारते.

सारी कविताएं बहुत उच्च स्तर की हैं.

गीत की भाषा शैली आसान और सहज है. इंडियन एक्सप्रेस ने उन्हें भारत के दस सर्वश्रेष्ठ युवा लेखकों में से एक माना है.

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